मतदाताओं के लिए आवश्यक जानकारी
प्रत्येक व्यक्ति जिसने 18 वर्ष या उससे अधिक की आयु प्राप्त कर ली है और जिसका नाम पंचायती राज संस्था या शहरी स्थानीय निकाय के किसी वार्ड या प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित पंचायत मतदाता सूची या नगर पालिका मतदाता सूची में दर्ज है, वह अन्य प्रावधानों के अधीन, पंचायती राज संस्था या शहरी स्थानीय निकाय के उस वार्ड/प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में मतदान करने का हकदार होगा। जिस व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, वह ऐसे चुनावों में मतदान नहीं कर सकेगा।
हरियाणा राज्य में, ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों, नगर पालिकाओं, नगर परिषदों और नगर निगमों के सभी प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र ‘एकल सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र’ (Single Member Constituencies) हैं। इसके अतिरिक्त, स्थानीय निकाय के केवल एक पद यानी ग्राम पंचायत के सरपंच का चुनाव प्रत्यक्ष चुनाव (Direct Election) द्वारा किया जाता है, जबकि अन्य सभी स्थानीय निकायों जैसे पंचायत समितियों, जिला परिषदों, नगर पालिकाओं, नगर परिषदों और नगर निगमों के अध्यक्षों का चुनाव इन निकायों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा या उनमें से अप्रत्यक्ष चुनाव (Indirect Election) द्वारा किया जाता है। इसलिए, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के किसी वार्ड के चुनाव के लिए मतदाता को केवल एक ही उम्मीदवार को अपना वोट देना होता है, क्योंकि ये एकल सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र हैं।
प्रत्येक चुनाव में मतदाता स्वयं उपस्थित होकर अपना वोट डालेगा और मतदान की गोपनीयता बनाए रखेगा। मतदान में किसी अन्य व्यक्ति के नाम से फर्जी मतदान (Impersonation) करना एक संज्ञान योग्य (Cognizable) अपराध है।
यदि कोई व्यक्ति हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 173 में उल्लिखित किसी भी योग्यता को पूरा करने में विफल रहता है, तो वह ग्राम पंचायत के पंच और सरपंच या पंचायत समिति और जिला परिषद के सदस्य के पद के चुनाव के लिए मतदान नहीं करेगा। इसी प्रकार, नगर पालिका समिति या नगर परिषद के सदस्य अथवा नगर निगम के सदस्य के पद के चुनाव के लिए, मतदाताओं की अयोग्यताएं हरियाणा नगर पालिका निर्वाचन नियम, 1978 के नियम 5 और हरियाणा नगर निगम निर्वाचन नियम, 1994 के नियम 5 में सूचीबद्ध की गई हैं।
कोई भी व्यक्ति एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान नहीं करेगा, भले ही उसका नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में पंजीकृत क्यों न हो। यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान करता है, तो ऐसे सभी निर्वाचन क्षेत्रों में उसके वोट अमान्य (Void) माने जाएंगे।
कोई भी व्यक्ति किसी भी चुनाव में एक ही निर्वाचन क्षेत्र में एक से अधिक बार मतदान नहीं करेगा, भले ही उसका नाम उस निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज क्यों न हो, ऐसा मतदान अमान्य होगा।
कोई भी व्यक्ति किसी भी चुनाव में मतदान नहीं करेगा यदि वह जेल में बंद है, चाहे वह कारावास की सजा के तहत हो या अन्यथा, या पुलिस की वैध हिरासत में हो।
यदि पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) संतुष्ट है कि दृष्टिहीनता या अन्य शारीरिक अयोग्यता के कारण मतदाता बैलेट पेपर पर प्रतीकों को पहचानने में असमर्थ है या बिना सहायता के उस पर निशान लगाने में असमर्थ है, तो वह ऐसे मतदाता को अपनी ओर से और अपनी इच्छा के अनुसार बैलेट पेपर पर वोट दर्ज करने के लिए 18 वर्ष से कम आयु के साथी (Companion) को मतदान कक्ष में ले जाने की अनुमति देगा। हालांकि, किसी भी व्यक्ति को एक से अधिक मतदाताओं के लिए साथी के रूप में कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
कोई भी पोलिंग एजेंट पीठासीन अधिकारी के पास पहले ₹2/- की राशि नकद जमा करके किसी विशेष मतदाता होने का दावा करने वाले व्यक्ति की पहचान को चुनौती दे सकता है। यदि पूछताछ के बाद पीठासीन अधिकारी को लगता है कि चुनौती सिद्ध नहीं हुई है, तो वह चुनौती दिए गए व्यक्ति को मतदान करने की अनुमति देगा।
यदि कोई व्यक्ति स्वयं को एक विशिष्ट मतदाता बताकर बैलेट पेपर के लिए आवेदन करता है, जबकि कोई अन्य व्यक्ति उस मतदाता के रूप में पहले ही वोट डाल चुका है, तो अपनी पहचान से संबंधित प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर देने पर पीठासीन अधिकारी उसे बैलेट पेपर पर निशान लगाने की अनुमति दे सकता है। इस वोट को ‘निविदा मत’ (Tendered Vote) कहा जाता है।
जिस मतदाता ने अनजाने में अपने बैलेट पेपर को इस तरह से खराब कर दिया है कि इसका उपयोग आसानी से नहीं किया जा सकता है, वह पीठासीन अधिकारी को इसे वापस करके और अनजाने में हुई गलती से संतुष्ट करके दूसरा बैलेट पेपर प्राप्त कर सकता है। यदि कोई मतदाता बैलेट पेपर प्राप्त करने के बाद इसका उपयोग न करने का निर्णय लेता है, तो वह इसे पीठासीन अधिकारी को वापस लौटा देगा।
ग्राम पंचायतों के पंचों और सरपंचों के पदों के चुनाव बैलेट पेपर द्वारा गैर-दलगत (गैर-राजनीतिक) आधार पर आयोजित किए जाते हैं और चुनाव इन दोनों पदों के लिए अलग से अधिसूचित मुक्त प्रतीकों (Free Symbols) पर होंगे। लेकिन पंचायत समिति, जिला परिषद, नगर पालिका समिति, नगर परिषद और नगर निगम के सदस्य के पद के चुनाव दलीय आधार (Party Basis) पर होंगे। भारत निर्वाचन आयोग के पास पंजीकृत और मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दलों और राज्य स्तरीय दलों के प्रतीक आरक्षित किए गए हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए पंचायत समिति और जिला परिषद के सदस्य तथा नगर पालिका समितियों, नगर परिषदों और नगर निगमों के सदस्य के चुनाव के लिए मुक्त प्रतीक अधिसूचित किए गए हैं।